दरभंगाबिहार

जयंती पर गूंजा कवीश्वर चन्दा झा का साहित्यिक योगदान

पिण्डारूच गांव में मैथिली रामायण के रचयिता कवीश्वर चन्दा झा की जयंती समारोह, प्रतिमा पर माल्यार्पण और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर जोर।

दरभंगा जिला के केवटी प्रखंड अंतर्गत पिण्डारूच गांव में माघ शुक्ल सप्तमी तिथि के अवसर पर मैथिली साहित्य के महान रचनाकार और मैथिली रामायण के रचयिता कवीश्वर चन्दा झा की जयंती श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक चेतना के साथ मनाई गई। यह आयोजन कवीश्वर चन्दा झा स्मृति समारोह समिति के तत्वावधान में कवीश्वर के पैतृक गांव पिण्डारूच स्थित उनके स्मारक परिसर में आयोजित किया गया, जहां उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

Kavishwar Chanda Jha Jayanti

कार्यक्रम का शुभारंभ जाले विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं ‘चंदा रत्न’ से सम्मानित श्री जीबेश मिश्रा द्वारा कवीश्वर चन्दा झा की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि कवीश्वर चन्दा झा केवल मैथिली साहित्य के रचनाकार ही नहीं थे, बल्कि वे मैथिल सांस्कृतिक चेतना के संवाहक भी थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि कवीश्वर की जयंती पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन नितांत आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ी उनके कृतित्व, विचार और साहित्यिक योगदान से परिचित हो सके।

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विधायक श्री मिश्रा ने कहा कि वे पूर्व में भी इस जयंती समारोह को सरकारी अनुदान एवं राजकीय कैलेंडर में शामिल कराने के लिए प्रयासरत रहे हैं और आगे भी इसके लिए निरंतर प्रयास जारी रखेंगे। उन्होंने स्थानीय लोगों से अपील की कि सरकारी सहयोग मिले या न मिले, कवीश्वर चन्दा झा की जयंती समारोह हर हाल में आयोजित होनी चाहिए, क्योंकि यह हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कवीश्वर की सांस्कृतिक विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने को पूरे मैथिल समाज का दायित्व बताया। साथ ही स्मारक के सामने स्थित तालाब में घाट निर्माण और स्मारक तक पहुंच पथ को दुरुस्त कराने के लिए स्थानीय मुखिया श्री गोपाल कुमार झा से समन्वय कर कार्य कराने की बात कही।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रियदर्शिनी नर्सिंग कॉलेज के संस्थापक डॉ. बिपिन पाठक ने भी कवीश्वर चन्दा झा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। अपने संबोधन में डॉ. पाठक ने कहा कि साहित्य और संस्कृति समाज की आत्मा होती है और ऐसे महापुरुषों की जयंती समारोह समाज को अपनी जड़ों से जोड़े रखने का कार्य करते हैं। उन्होंने आगामी जयंती समारोह में यथासंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।

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इस अवसर पर स्थानीय अनादि फाउंडेशन के संस्थापक एवं दिल्ली विश्वविद्यालय से अवकाश प्राप्त व्याख्याता श्री प्रदीप कान्त चौधरी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जयंती समारोह का आयोजन इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि सरकार से कितना सहयोग मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आयोजन सुनिश्चित होना चाहिए, और यदि सरकारी सहयोग मिले तो कार्यक्रम का दायरा और व्यापक हो सकता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं को ऐसे आयोजनों से जोड़ने पर बल दिया, ताकि कवीश्वर चन्दा झा की जयंती मनाने की परंपरा निरंतर बनी रहे। साथ ही उन्होंने आगामी कार्यक्रमों में आर्थिक सहयोग देने की भी घोषणा की।

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स्थानीय मुखिया श्री गोपाल झा ने अपने वक्तव्य में कहा कि उन्होंने अपने पूर्व कार्यकाल में भी स्मारक निर्माण में भरपूर सहयोग दिया था और आगे भी संस्था की आवश्यकताओं के अनुसार सहयोग देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि गांव की सांस्कृतिक पहचान को सहेजना उनकी प्राथमिकता है।

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केडीएन मीडिया समूह के संस्थापक सीतेश चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में ऐसी सांस्कृतिक गतिविधियों, मांगों और सूचनाओं को लगातार डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रमुखता से रखा जाना चाहिए। उन्होंने सरकार के संबंधित विभागों को सोशल मीडिया के माध्यम से टैग कर निरंतर संवाद बनाए रखने पर बल दिया, ताकि कवीश्वर चन्दा झा से जुड़ी मांगों को उचित मंच मिल सके।

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कार्यक्रम के दौरान पं. शिवनाथ महाराज, इंद्रनाथ महाराज, मणिकांत चौधरी, स्थानीय पंचायत समिति सदस्य सीताकांत झा, टेकटार पंचायत के मुखिया पवन कुमार कर्ण, शंकर नाथ झा ‘बटोही भाई’, सूर्यकांत झा, दिव्यनाथ महाराज ‘निराला’ सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए और कवीश्वर चन्दा झा के साहित्यिक योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष श्री ललित चौधरी ने की, जबकि आयोजन संस्था के सचिव एवं फिल्म अभिनेता नवीन चौधरी की देखरेख में संपन्न हुआ। मंच संचालन की जिम्मेदारी निराला महाराज ने कुशलतापूर्वक निभाई। साज- सज्जा एवं अतिथि स्वागत स्थानीय छात्रा रिमझिम की देखरेख में हुआ।

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इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण, बुद्धिजीवी, साहित्य प्रेमी एवं मीडियाकर्मी उपस्थित रहे। संपूर्ण वातावरण मैथिली संस्कृति, साहित्य और कवीश्वर चन्दा झा की स्मृतियों से ओत-प्रोत नजर आया।

Sitesh Choudhary

चढ़ते हुए सूरज की परस्तिश नहीं करता, लेकिन, गिरती हुई दीवारों का हमदर्द हूँ।
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